
बिहार में शराबबंदी को लेकर जारी अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ और सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून पर किसी भी तरह की समीक्षा बैठक नहीं होगी और न ही इस कानून से कोई समझौता किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई जा रही थी। लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू रहेगी और इसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।

सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी बिहार सरकार की प्राथमिक नीतियों में शामिल है, जिसका उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाना और अपराध पर नियंत्रण पाना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कानून को और सख्ती से लागू करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर रोक लगाई जा सके।
सरकार का मानना है कि शराबबंदी से राज्य में सामाजिक सुधार हुआ है, खासकर महिलाओं और परिवारों को इसका लाभ मिला है। हालांकि, दूसरी ओर कुछ वर्गों का कहना है कि इस कानून के कारण अवैध शराब कारोबार बढ़ा है और इससे जुड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इन सबके बीच मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट संदेश यह दर्शाता है कि बिहार सरकार शराबबंदी के मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।