Jharkhand – Hazaribagh के चौपारण प्रखंड में NH-2 सिक्सलेन सड़क निर्माण अब सवालों के घेरे में है। गांव पिपरा से सामने आई तस्वीरों और शिकायतों ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासी सुरेश कुमार साव ने साक्ष्यों के साथ उपायुक्त को शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि चेनज संख्या 275+200 के पास लगाए जा रहे होम पाइप कलवर्ट पहले से ही टूटे हुए थे, लेकिन उन्हें बदले बिना ही निर्माण में लगा दिया गया। तस्वीरों में साफ दिखता है कि पाइप किनारों से क्षतिग्रस्त हैं—यानी शुरुआत से ही काम में लापरवाही की झलक नजर आ रही है।

सिर्फ पाइप ही नहीं, बल्कि मिट्टी भराई में भी भारी गड़बड़ी का आरोप है। ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण में ईंटों के मलबे और अनुपयुक्त मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। भराई के ढेरों में ईंट-पत्थर के टुकड़े साफ नजर आते हैं, जो आने वाले समय में सड़क की मजबूती को कमजोर कर सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पिपरा में बनी सर्विस रोड चालू होने से पहले ही कई जगहों से टूटने लगी है। सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें दिख रही हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है।

मामला यहीं नहीं थमता—ग्राम टिटाही के सिंघरावा मोड़ के पास बना वाहन अंडरपास (VUP) भी शुरू होने के महज 2-3 दिनों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गया। यानी जिस सड़क और संरचना पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, वह शुरू होने से पहले ही जवाब दे रही है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने पहले ही साइट इंजीनियर मुकेश शर्मा को व्हाट्सएप के जरिए इस बारे में सूचित किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह शक गहरा गया है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार लोग ठेकेदार को बचाने में लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क का मामला नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और सरकारी पैसों की बर्बादी से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत उच्च स्तरीय जांच हो, निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सड़क का निर्माण दोबारा मानकों के अनुसार कराया जाए।

शिकायत के साथ फोटो, वीडियो और व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट जैसे पुख्ता साक्ष्य भी सौंपे गए हैं, जिनमें टूटे पाइप, घटिया भराई और क्षतिग्रस्त सड़क की हकीकत साफ देखी जा सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, क्योंकि यह मामला सिर्फ निर्माण की खामी नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का भी बड़ा सवाल बन चुका है।