बिहार बुलडोजर एक्शन 2026 – अप्रैल 2026 में बिहार की NDA सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया, जिसका नेतृत्व सम्राट चौधरी कर रहे हैं। इस कार्रवाई के तहत आरा, छपरा, दरभंगा और बेतिया जैसे शहरों में नगर निगम की टीमों ने बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों को हटाया है। अब तक 250 से ज्यादा अवैध दुकानें, ठेले और अस्थायी ढांचे ध्वस्त किए जा चुके हैं।

सरकार का कहना है कि यह कदम ट्रैफिक जाम, फुटपाथ पर कब्जे और सरकारी जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को रोकने के लिए जरूरी था, साथ ही स्मार्ट सिटी और सड़क चौड़ीकरण योजनाओं के लिए जमीन खाली कराना भी मकसद है। प्रशासन के मुताबिक, कार्रवाई से पहले 15 दिन का नोटिस दिया गया था, लेकिन समयसीमा खत्म होने के बाद ही बुलडोजर चलाया गया।

इस अभियान को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। तेजस्वी यादव और RJD ने इसे “गरीब विरोधी बुलडोजर राज” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ छोटे दुकानदारों और रेहड़ी वालों को निशाना बना रही है, जबकि बड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं हो रही।

कांग्रेस ने भी इसे अमानवीय बताते हुए बिना पुनर्वास योजना के कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं चिराग पासवान ने कहा कि अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन प्रभावित लोगों के लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। इन आरोपों पर जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और यह अभियान हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रहा है, साथ ही आगे पटना और मुजफ्फरपुर में भी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता पर इस कार्रवाई का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां कई छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और शहरों में व्यवस्था बेहतर होगी। 2026 चुनावी साल होने के कारण यह मुद्दा अब बिहार की राजनीति का बड़ा केंद्र बन गया है, जहां सरकार इसे विकास और सख्त प्रशासन का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे गरीब विरोधी और चुनिंदा कार्रवाई करार दे रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास योजना लाएगी और क्या बड़े अवैध कब्जों पर भी समान रूप से बुलडोजर चलेगा।